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Draft:Diwan kanwal

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दीवान सिंह कनवाल
दीवान कनवाल
Born5 फरवरी 1961
पारखोला, खत्याड़ी, अल्मोड़ा, उत्तराखंड, भारत
Died11 मार्च 2026
अल्मोड़ा, उत्तराखंड, भारत
Occupationsलोकगायक, अभिनेता, सांस्कृतिक कर्मी
Years active1980–2026
Known forकुमाऊँनी लोकसंगीत, रामलीला और रंगमंच

दीवान सिंह कनवाल (5 फरवरी 1961 – 11 मार्च 2026), जिन्हें दीवान दा के नाम से भी जाना जाता था, उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र के लोकगायक, अभिनेता और सांस्कृतिक कर्मी थे। वे कुमाऊँनी लोकसंगीत, आकाशवाणी, रामलीला और रंगमंच से जुड़े रहे। उन्होंने कई कुमाऊँनी लोकगीतों को अपनी आवाज दी तथा कुमाऊँनी रंगमंच और फिल्म से भी जुड़े रहे।[1]

प्रारंभिक जीवन

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दीवान सिंह कनवाल का जन्म 5 फरवरी 1961 को अल्मोड़ा के पारखोला, खत्याड़ी गांव में त्रिलोक सिंह कनवाल और रेवती कनवाल के घर हुआ था। उनके पिता अल्मोड़ा कोऑपरेटिव बैंक में कार्यरत थे और रामलीला में गायन तथा अभिनय से भी जुड़े थे। पिता के सांस्कृतिक जुड़ाव का प्रभाव दीवान सिंह कनवाल के जीवन पर पड़ा और उन्होंने बचपन से ही रामलीला तथा गायन में भाग लेना शुरू किया।[1]

उन्होंने अल्मोड़ा के खत्याड़ी क्षेत्र की रामलीला में गायन और अभिनय किया। बाद में लक्ष्मी भंडार की रामलीला में उन्होंने मंदोदरी की भूमिका निभाई। इसके बाद उन्होंने परशुराम और दशरथ सहित अन्य भूमिकाएँ भी निभाईं।[1]

आकाशवाणी और संगीत

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वर्ष 1980 में दीवान सिंह कनवाल नजीबाबाद रेडियो स्टेशन से बी-ग्रेड कलाकार के रूप में जुड़े। इसके बाद वे आकाशवाणी अल्मोड़ा से भी जुड़े और वहां विभिन्न लोकगीतों तथा गीत-नाटिकाओं में गायन किया।[1]

कुमाऊँनी लोकसंगीत में उनकी पहचान विशेष रूप से लोकगीतों के गायन से बनी। उनके गायन का एक प्रमुख पड़ाव वर्ष 1987 में आया, जब जीवन सिंह बिष्ट द्वारा निर्मित कुमाऊँनी फिल्म मेघा आ के गीत 'यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा' को उन्होंने अपनी आवाज दी। प्रकाशित स्रोतों के अनुसार इस गीत से उन्हें व्यापक पहचान मिली।[1]

कुमाऊँनी लोकसंगीत

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दीवान कनवाल ने अनेक कुमाऊँनी लोकगीतों को अपनी आवाज दी। उनके चर्चित गीतों में यौ डाना कौ पारा, आज कौंछे मैत जा, भौल कौंछे मैत जा, दाज्यू मेरी घरवाई रिसै गे, कसि भिड़ै कुनई पंडित ज्यू, कस करो यो ब्या और ह्यूं भरी दाना शामिल हैं।[1]

उनसे जुड़े संगीत एल्बमों में थात बात, सुवा, पैलाग, हुड़की घमा-घम, नंदा चालीसा, जय मैया बाराही तथा सुफल हैई जै पंचनाम देवा के नाम प्रकाशित स्रोतों में मिलते हैं।[1]

2025 में उन्होंने लोकगायक डॉ. अजय ढौंडियाल के साथ मिलकर कुमाऊँनी लोकगीतों की प्रस्तुतियाँ और रिकॉर्डिंग कीं। दोनों ने 'सलम चौकीदारा' सहित कई गीत प्रस्तुत किए। सलम चौकीदारा के बारे में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इसके गीतकार बालम सिंह जनौटी थे और संगीत रंजीत सिंह ने दिया था।[2]

जनवरी 2026 में बागेश्वर के उत्तरायणी मेले में उन्होंने अरुण ढौंडियाल के साथ भी लोकगीतों की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में उन्होंने द्वि दिन का ड्यार शेरुवा य दूनी में, न त्यार न म्यार शेरुवा य दूनी में गीत से प्रस्तुति की शुरुआत की।[3]

रंगमंच और अभिनय

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गायन के अतिरिक्त दीवान सिंह कनवाल रंगमंच से भी जुड़े रहे। उन्होंने रामलीला के साथ-साथ विभिन्न नाटकों में अभिनय और निर्देशन किया। प्रकाशित स्रोतों में उनके प्रमुख नाटकों में कलबिष्ट, गंगनाथ, हरूहीत, बाइस भाई बफौल, तीलू रौतूली, सरू कुमैण और गढ़ सुम्याल का उल्लेख मिलता है।[1]

उन्होंने अल्मोड़ा की रामलीला परंपरा में विभिन्न भूमिकाएँ निभाईं। उनकी शुरुआती भूमिकाओं में मंदोदरी का पात्र शामिल था, जबकि बाद में उन्होंने परशुराम और दशरथ जैसे पात्रों का अभिनय किया।[1]

बैंक सेवा

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सांस्कृतिक गतिविधियों के साथ-साथ दीवान सिंह कनवाल ने अल्मोड़ा के जिला सहकारी बैंक में कार्य किया। उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार वे बैंक में प्रबंधकीय पद पर कार्यरत रहे और 2021 में सेवानिवृत्त हुए।[1]

अंतिम समय और निधन

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दीवान सिंह कनवाल पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थे और उनका हल्द्वानी के एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा था। उनका ऑपरेशन भी हुआ था। उपचार के बाद वे अपने घर लौटे थे। 11 मार्च 2026 की सुबह अल्मोड़ा स्थित अपने आवास पर उनका निधन हुआ। उस समय उनकी आयु लगभग 65 वर्ष थी।[4]

उनका अंतिम संस्कार अल्मोड़ा के बेतालेश्वर घाट में किया गया। उनके परिवार में उनकी माता, दो पुत्र और दो पुत्रियाँ थीं। उनकी पत्नी का निधन उनसे पहले हो चुका था।[4]

उनके निधन के बाद उत्तराखंड के सांस्कृतिक क्षेत्र में शोक व्यक्त किया गया और कुमाऊँनी लोकसंगीत तथा संस्कृति में उनके योगदान को याद किया गया।[4]

प्रमुख गीत

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  • यौ डाना कौ पारा
  • आज कौंछे मैत जा, भौल कौंछे मैत जा
  • दाज्यू मेरी घरवाई रिसै गे
  • कसि भिड़ै कुनई पंडित ज्यू, कस करो यो ब्या
  • ह्यूं भरी दाना
  • सलम चौकीदारा
  • द्वि दिन का ड्यार शेरुवा य दूनी में

एल्बम

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  • थात बात
  • सुवा
  • पैलाग
  • हुड़की घमा-घम
  • नंदा चालीसा
  • जय मैया बाराही
  • सुफल हैई जै पंचनाम देवा

संदर्भ

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  1. 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 "कुमाऊं की पहली फिल्म में आवाज देने वाले दीवान दा हुए खामोश". अमर उजाला. 11 मार्च 2026. {{cite news}}: Check date values in: |date= (help)
  2. ↑ "उत्तराखंडः दीवान-अजय की जुगलबंदी ने मचाया धमाल, "सलम चौकीदारा" से लौट आया पुराना लोकसंगीत". पहाड़ प्रभात. 5 जुलाई 2025. {{cite news}}: Check date values in: |date= (help)
  3. ↑ "दीवान, अरुण की जुगलबंदी ने मचाया धमाल". हिन्दुस्तान. 16 जनवरी 2026. {{cite news}}: Check date values in: |date= (help)
  4. 1 2 3 "उत्तराखंड: कुमाऊनी लोकगायक दीवान कनवाल का निधन, सांस्कृतिक जगत में गहरा शोक". दैनिक जागरण. 11 मार्च 2026. {{cite news}}: Check date values in: |date= (help)

श्रेणी:1961 में जन्मे लोग श्रेणी:2026 में निधन श्रेणी:उत्तराखंड के लोक गायक श्रेणी:कुमाऊँनी लोक गायक श्रेणी:अल्मोड़ा के लोग श्रेणी:उत्तराखंड के अभिनेता




References

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